Dhatu Roop In Sanskrit संस्कृत में धातु रूप

Dhatu Roop In Sanskrit : संस्कृत में कितने धातु रूप होते हैं?, धातु के कितने भेद होते हैं? आत्मनेपद और परस्मैपद क्या है? धातु रूप कैसे लिखते हैं? संस्कृत में गण का क्या अर्थ होता है? आदि प्रश्नों के उत्तर को इस पोस्ट में आसान भाषा में समझाया गया है |

धातु रूप उदाहरण सहित

Table of Contents

जिस शब्द द्वारा किसी कार्य के करने या होने का बोध हो उसे क्रिया कहते हैं। और क्रियापद के मूलरूप को धातु कहा जाता है।

उदाहरणार्थ – राम: पुस्तक पठति।

इस वाक्य में राम कर्ता है और उसके द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है। यहाँ ‘पठ्‘ धातु के द्वारा पढ़ना क्रिया का होना प्रकट होता है। जिससे ‘पठति‘ रूप बना है।

संस्कृत में कितने धातु रूप होते हैं? Dhatu Roop In Sanskrit

  1. लट्लकार
  2. लिट्लकार
  3. लुट्लकार
  4. लुट्लकारें
  5. लेट्लकार
  6. लोट्लकार
  7. लड़लकार
  8. लिड्लकार (विधिलिड्‌ + आशीर्लिंडू)
  9. लुड्लकार
  10. लुड्लकार।

संस्कृत में गण कितने होते हैं?

संस्कृत साहित्य में विभिन्‍न अर्थों को बताने के लिए अनेक धातुएँ हैं। इनका विभाजन 10 गणों में किया गया है।

  1. भ्वादिगण
  2. अदादिगण
  3. जुहोत्यादिगण
  4. दिवादिगण
  5. स्वादिगण
  6. रुधादिगण
  7. तुदादिगण
  8. तनादिगण
  9. क्रयादिगण
  10. चुरादिगण

गणों के नामकरण का आधार उस गण में आने वाली प्रथम धातु है, जैसे- ‘भ्वादिगण’ का आधार उसमें सर्वप्रथम आनेवाली ‘भू’ धातु है (भू + आदि)‘चुरादिगण’ का आधार सर्वप्रथम आने वाली ‘चुर’ धातु हैं। इसी प्रकार अन्य गणों का नामकरण भी उनके प्रथम धातु पर ही आधारित है।

एक गण में कितनी धातुएँ पायी जाती है?

इसके अतिरिक्त प्रत्येक गण में तीन प्रकार की धातुँ पाई जाती है —

  1. परस्मैपदी
  2. आत्मनेपदी
  3. उभयपदी

परस्मैपदी धातुओं के वर्तमानकाल में ‘ति’, ‘त’:, ‘अन्ति’ (पठति, पठत:, पठन्ति) रूप पाया जाता है और आत्मनेपदी धातुओं में ‘ते’, ‘इते’, ‘अन्ते’ (सेवते, सेवेते, सेवन्ते)| पढ़, लिखू, गम्‌ आदि धातुओं का परस्मैपद में प्रयोग होता है, जब कि ‘सेव्‌’, ‘मुद’, ‘लभ’ आदि धातुओं का आत्मनेपद में प्रयोग किया जाता है। इनके अतिरिक्त कुछ धातुँ ऐसी भी हैं जो उभयपदी हैं, जिनमें दोनों ही प्रकार के रूप पाए जाते हैं। इनमें ‘कृ’, ‘ब्रू, ‘पचू’ आदि धातुएँ उल्लिखित की जा सकती हैं कू (प.) करोति, (आ) कुरुतेउभयपदी धातुओं का यदि क्रिया फल कर्तृंगामी हो, तो आत्मनेपद एवं परगामी हो तो परस्मैपद का प्रयोग किया जाता है|

संस्कृत में कितने लकार होते हैं ? Dhatu Roop In Sanskrit

काल एवं विधि आदि अर्थों के आधार पर संस्कृत व्याकरण में दस लकार Dhatu Roop In Sanskrit पाए जाते हैं |

  1. लट्लकार
  2. लिट्लकार
  3. लुट्लकार
  4. लुट्लकारें
  5. लेट्लकार
  6. लोट्लकार
  7. लड़लकार
  8. लिड्लकार (विधिलिड्‌ + आशीर्लिंडू)
  9. लुड्लकार
  10. लुड्लकार।

1. लट्लकार

वर्तमान काल को व्यक्त करने के लिए लट्लकार का प्रयोग किया जाता है|

यथा –
(i) राम: पाठ पठति।
(ii) छात्र: गुरुं सेवते।

2. लिट्लकार

लिट्लकार का प्रयोग ऐसी घटना का वर्णन करने के लिए होता है जो हमारी आँखों के सामने न घटी हो और ऐतिहासिक भी हो।
यथा – राम: रावण जघान।

3. लुट्लकार

भविष्य काल की क्रिया को व्यक्त करने के लिए लुट्लकार का प्रयोग किया जाता है। किन्तु यह काल अद्यतन ‘आज का’ नहीं होना चाहिए|
यथा – श्व: प्रधानमंत्री रूसदेश॑ गन्ता।

4. लुट्लकार

सामान्य भविष्यत्‌ काल की घटनाओं को व्यक्त करने के लिए लूट्लकार का प्रयोग किया जाता है

यथा – स; लेखं लेखिष्यति।

5. लेट्लकार

अनेक कालों तथा अनेक मनोभावों को प्रकट करने वाले इस लकार का प्रयोग वेद में ही पाया जाता है| लौकिक संस्कृत में इसका अभाव है।

6. लोट्लकार

आज्ञा देने के भाव को प्रकट करने के लिए लोट्लकार का प्रयोग किया जाता है।

यथा –स: गृहकार्य करोतु।

7. लड़्लकार

अनद्यतन भूतकाल की क्रिया को बताने के लिए लड्लकार का प्रयोग किया जाता है|

यथा – राम: पाठम्‌ अपठतु।

8. विधिलिड्‌:

‘चाहिए’, ‘करे’ आदि विध्यात्मक भावों को प्रकट करने के लिए विधिलिड्‌ का प्रयोग किया जाता है|

यथा – स; लेख लिखेत्‌।

‘लिड्‌ का एक भेद आशीलिंडू भी है, जिसका प्रयोग आशीर्वाद देने के लिए होता है|

यथा -त्वं चिरायु: भूया:।

9. लुडूलकार

सामान्य भूतकाल की क्रिया को व्यक्त करने के लिए ‘लुड़लकार का प्रयोग किया जाता है|

यथा – पुरा राजा नल: अभूत्‌।

10. लूडूलकार

भाषा में कभी ऐसी स्थिति भी आती है जब किसी एक क्रिया के न होने पर दूसरी क्रिया में सफलता नहीं मिलती। वैसी स्थिति में ‘लुड्लकार का प्रयोग होता है|

यथा – यदि वर्षा अभविष्यत्‌ तहिं दुर्भिक्षं नाभविष्यत्‌।

परस्मैपदी क्रियाओं में लगने वाले प्रत्यय

परस्मैपदी क्रियाओं में लगने वाले नौ प्रत्यय हैं जो निम्नलिखित हैं –

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषतिप्तस्‌झि
मध्यम पुरुषसिप्‌थस्‌
उत्तम पुरुषमिप्वस् मस्
परस्मैपदी क्रियाओं में लगने वाले प्रत्यय

आत्मनेपदी क्रियाओं में लगने वाले प्रत्यय

आत्मनेपदी क्रियाओं में लगने वाले नौ प्रत्यय हैं जो निम्नलिखित हैं –

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषआताम्झि
मध्यम पुरुषथास्‌आथाम्‌ध्वम्‌
उत्तम पुरुषइट्वहिमहिङ्
आत्मनेपदी क्रियाओं में लगने वाले प्रत्यय

सुविधा के लिए माध्यमिक स्तर को दृष्टि में रखते हुए पाँच ‘लकारों में प्रयोग होने वाले प्रत्यय यहाँ दिए जा रहे हैं। इनकी सहायता से छात्रों को धातुरूपों को याद रखने में सहायता मिलेगी।

1. लट्लकार (वर्तमानकाल) Dhatu Roop In Sanskrit

A. परस्मैपदी क्रिया प्रत्यय

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषतितःअन्ति
मध्यम पुरुषसिथ:
उत्तम पुरुषमिव:मः

B. आत्मनेपदी क्रिया प्रत्यय

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषतेइतेअन्ते
मध्यम पुरुषसेइथेध्वे
उत्तम पुरुषवहेमहे

2. लड़्लकार (भूतकाल)

A. परस्मैपदी क्रिया प्रत्यय

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषत्ताम्‌ अन्
मध्यम पुरुष:तम्  त्
उत्तम पुरुषअम्‌आवआम

B. आत्मनेपदी क्रिया प्रत्यय

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषत्इताम्‌अन्त
मध्यम पुरुषथा: इथाम्‌ध्वम्‌
उत्तम पुरुषवहिमहि

3. लृट्लकार (भविष्यत्‌ काल)

A. परस्मौपदी क्रिया प्रत्यय

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषस्यतिस्यत:  स्यन्ति
मध्यम पुरुषस्यसिस्यथ:स्यथ
उत्तम पुरुषस्यामिस्याव:स्याम:

B. आत्मनेपदी क्रिया प्रत्यय

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषस्यतेस्येतेस्यन्ते
मध्यम पुरुषस्यसेस्येथेस्यध्वे
उत्तम पुरुषस्येस्यावहेस्यामहे

4. लोट्लकार (आज्ञार्थक)

A. परस्मैपदी क्रिया प्रत्यय

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषतुताम्अन्तु
मध्यम पुरुषतम्
उत्तम पुरुषआनिआवआम

B. आत्मनेपदी क्रिया प्रत्यय

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषताम्‌ इताम्‌ अन्ताम्‌
मध्यम पुरुषस्व इथाम्‌ध्वम्‌
उत्तम पुरुषआवहैआमहै

5. विधिलिङ् (चाहिए के योग में)

A. परस्मैपदी क्रिया प्रत्यय

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषइत्इताम्इयु:
मध्यम पुरुषइ:इतम्‌इत
उत्तम पुरुषइयम्‌इवइम

B. आत्मनेपदी क्रिया प्रत्यय

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषईतईयाताम्‌ईरन्
मध्यम पुरुषईथा:ईयाथाम्ईध्वम्‌
उत्तम पुरुषईयईवहिईमहिं

संस्कृत के विभिन्न धातु रूप पढ़ें

  1. लिख् धातु रूप
  2. भू धातु रूप

Watch Dhatu Roop Sanskrit Video

dhatu roop video

Video Credit : Magnet Brains YouTube Channel

Dhatu Roop Sanskrit FAQ

1. धातु रूप किसे कहते है?

Ans . जिस शब्द द्वारा किसी कार्य के करने या होने का बोध हो उसे क्रिया कहते हैं। और क्रियापद के मूलरूप को धातु कहा जाता है।

2. संस्कृत में कितने धातु रूप होते हैं?

Ans . संस्कृत में 10 धातु रूप होते है/
लट्लकार
लिट्लकार
लुट्लकार
लुट्लकारें
लेट्लकार
लोट्लकार
लड़लकार
लिड्लकार (विधिलिड्‌ + आशीर्लिंडू)
लुड्लकार
लुड्लकार।

3. संस्कृत में गण कितने होते हैं?

Ans. संस्कृत में 10 गण होते है |

4. लट्लकार किसे कहते है?

Ans. लिट्लकार का प्रयोग ऐसी घटना का वर्णन करने के लिए होता है जो हमारी आँखों के सामने न घटी हो और ऐतिहासिक भी हो।
यथा – राम: रावण जघान।

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