शिक्षण की महत्तवपूर्ण खेल विधियाँ | शिक्षण विधियाँ

शिक्षण की महत्तवपूर्ण खेल विधियाँ | शिक्षण विधियाँ : – इस भाग में शिक्षण की महत्तवपूर्ण Khel Vidhiyaan के बारे में जानकारी दी गई है, किंडर गार्डन, साहचर्य विधि, डाल्टन और प्रत्यक्ष विधियों का विस्तृत वर्णन दिया गया है। इन विधियों के गुणों और दोषों का भी विस्तारपूर्वक वर्णन है।

खेल विधि

  • सबसे पहले इंग्लैंड के गणित शिक्षक हेनरी कोल्डवेल कुक ने कहा खेल एकमात्र ऐसा कार्य है जिसे बालक पूरे मन से करता है
  • इन्होंने ही सबसे पहले खेल-खेल में बालकों को गणित सिखाना शुरू किया इसलिए इन्हें खेल विधि का वास्तविक जनक माना जाता है।
  • वर्तमान समय में कई प्रकार की खेल विधियां प्रचलित हैं जिनमें से प्रमुख निम्न है –

किंडरगार्टन विधि

  • फ्रोबल के द्वारा दी गई इस विधि में सबसे पहले माना गया कि एक बालक जितना स्वतंत्र होकर सीखता है उतना ही शीघ्रता से और अधिक सीखता है।
  • इस विधि में शिक्षक को माली की एवं बालकों को बढ़ते हुए पौधों में खिलते हुए फूलों की संज्ञा दी।
  • जिस प्रकार से एक माली बगीचे में पौधों के फूलों के लिए परवरिश को महत्व देता है उसी प्रकार से शिक्षक को भी चहोंमुखी विकास का ध्यान रखना चाहिए।

साहचर्य विधि

  • सबसे पहले इसका प्रयोग इटली की शिक्षिका मारिया मोंटेसरी ने किया इसलिए इसे मोंटेसरी विधि भी कहते हैं।
  • इस विधि में विभिन्न प्रकार की वस्तुओं एवं खिलौनों का उपयोग करते हुए बालकों को खेल-खेल में सिखाया जाता है।
  • भाषा शिक्षण के दृष्टिकोण से इस विधि का उपयोग करते समय कक्षा कक्ष में कुछ वस्तुएं रख दी जाती हैं।
  • उन वस्तुओं के नाम लिखी पर्चियां उनके साथ लगा दी जाती है।
  • सभी बालकों को एक बार उन्हें दिखा देते हैं उसके बाद वस्तुओं से पर्ची हटा दी जाती है।
  • एक-एक बालक को सही नाम वाली पर्ची सही वस्तु पर रखवाने का अभ्यास करवाते हैं जिससे बालकों में संज्ञा शब्दों का ज्ञान हो जाता है।

डाल्टन विधि

  • यह विधि अमेरिका के डॉलटन शहर में पहली बार उपयोग में लाई गई इसलिए इसी शहर के नाम से जानी जाती है।
  • इस विधि को कुमारी हेलेना पार्क हर्स्ट ने दिया।
  • यह एक प्रकार की नवीन विद्यालय प्रणाली है।
  • जिसमें बिना किसी समय सारणी एवं अतिरिक्त नियंत्रण के स्वतंत्र रूप से चलने वाले विद्यालय होते हैं।

खेल विधि के गुण

  • मनोवैज्ञानिक विधि होती है।
  • बालकों के लिए रुचिकर होती है।
  • बालकों में शारीरिक, मानसिक विकास को जन्म देती है।
  • सहयोग एवं प्रतिस्पर्धा की भावनाओं का विकास करती है।
  • इस विधि का उपयोग करने से बालक में तर्क व चिंतन का विकास होता है।

खेल विधि के दोष

  • सामान्य विद्यालय वातावरण में अधिक उपयोगी नहीं है।
  • बालकों में शीघ्रता से थकान आ जाती है।
  • कई बार दुर्घटना होने का भय रहता है।
  • संसाधनों का अभाव पाया जाता है।
  • इस विधि का उपयोग करने से लेखन कौशल का विकास नहीं हो पाता है।

प्रत्यक्ष विधि Khel Vidhiyaan

  • 1901 में फ्रांस के द्वारा विकसित की गई इस विधि में जब एक बालक को किसी अन्य भाषा के शब्दों का ज्ञान करवाया जाता है।
  • तो उस समय उस बालक को उस शब्द का मातृभाषा में अर्थ बताने के स्थान पर उसके सामने संबंधित वस्तु को ही प्रत्यक्ष रूप से रख दिया जाता है।
  • यदि एक बालक को FAN शब्द का अर्थ बताना है तो उसके सामने प्रत्यक्ष रूप से पंखा रख दिया जाता है।
  • भारत देश में इस विधि का उपयोग सबसे पहले मद्रास ( चेन्नई ) में प्रोफेसर येट्स के द्वारा बीसवीं सदी के प्रारंभ में किया गया था

प्रत्यक्ष विधि के गुण Khel Vidhiyaan

  • यह मनोवैज्ञानिक विधि है।
  • बालकों को प्रत्यक्ष व स्थाई अनुभव करवाती है।

प्रत्यक्ष विधि के दोष

  • यह केवल संज्ञा शब्दों का ज्ञान ही करवा सकती है

FAQ Khel Vidhiyaan

1. खेल विधि के वास्तविक जनक कौन है ?

ANS. इंग्लैंड के गणित शिक्षक हेनरी कोल्डवेल कुक

2. किंडरगार्टन विधि के जनक कौन है ?

ANS. फ्रोबेल

3. मोंटेसरी विधि किसे कहते है ?

ANS. साहचर्य विधि को ही मोंटेसरी विधि कहते है क्योंकि इसका सबसे पहले उपयोग मरिया मोंटेसरी ने ही किया था।

4. डाल्टन विधि किसने दी थी?

ANS. कुमारी हेलना पार्क हर्स्ट ने

5. खेल विधि का सबसे बड़ा दोष क्या है?

ANS. इन विधियों से लेखन कौशल का विकास नही होता है।

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